Friday Aug 29, 2025

Man par vijay मन पर विजय

मन पर विजय 

मन को मात देने को गहरी यात्रा माना गया है।

मन दुनिया में निरंतर भटकता है—इच्छाओं, भय, स्मृतियों और कल्पनाओं के जाल में। लेकिन जो साधक धीरे-धीरे अपने भीतर उतरता है, वह समझने लगता है कि असली शत्रु बाहर नहीं, बल्कि अंदर ही है। 

जब व्यक्ति मन को मात देता है—उसके उठते विचारों, भावनाओं और तरंगों को केवल देखता है—तभी मन की शक्ति टूटती है। धीरे-धीरे मन शांत होकर साधक का सेवक बन जाता है, मालिक नहीं। 

नमस्ते।

 

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